हॉस्टल का पहला हफ़्ता। मेस की पतली दाल सामने रखी है और अचानक याद आता है कि घर पर माँ हर रोज़ पूछती थी, “एक रोटी और?” और हम हर बार मना कर देते थे। जो चीज़ रोज़ मिलती है, उसकी कदर अक्सर तभी समझ आती है जब वो छूट जाती है।
ये Kadar Shayari in Hindi उसी देर से आई समझ के बारे में है, और उस कोशिश के बारे में भी कि अगली बार कदर वक़्त पर हो। बीच में रहीम के दो दोहे भी हैं, जो यही बात सदियों पहले कह गए थे।
Kadar Shayari in Hindi
कदर उसकी करो जो बिन कहे समझ जाता है,
ऐसा इंसान हर किसी के हिस्से कहाँ आता है।
जो बिना मतलब हर मोड़ पर साथ चलते हैं,
ऐसे लोग ज़िंदगी में बड़ी मुश्किल से मिलते हैं।
पास था तो उसकी कदर कभी की ही नहीं,
अब दूर है तो उसकी कमी जाती ही नहीं।
रिश्ते दौलत से नहीं, कदर से चलते हैं,
जहाँ इज़्ज़त हो, वहीं दिल मिलते हैं।
हीरे की कदर तो जौहरी ही जानता है,
सच्चे दिल को कोई-कोई ही पहचानता है।
जो तुम्हारी हर ख़ुशी में अपनी ख़ुशी पाए,
ख़ुदा करे ऐसा साथ कभी न छूट जाए।
जो बुरे वक़्त में भी तुम्हारे साथ खड़ा रहा,
वो दिखने में छोटा सही, दिल से सबसे बड़ा रहा।
कदर करना सीखो उनकी जो चुपचाप निभाते हैं,
शोर मचाने वाले तो अक्सर छोड़ जाते हैं।

वक़्त रहते कदर कर लो
जो कहना है आज ही कह दो, कल का क्या ठिकाना,
कदर वक़्त पर न हो, तो बस रह जाता है पछताना।
वक़्त रहते जो अपनों को गले लगा लेते हैं,
वही लोग बाद के पछतावे से बच जाते हैं।
“बाद में बात करूँगा” कहकर हम टालते गए,
और वक़्त के साथ रिश्ते भी हाथ से निकलते गए।
माँ-पापा के पास बैठो, थोड़ी बातें कर लो,
ये लम्हे फिर न मिलेंगे, इन्हें दिल में भर लो।
ज़िंदगी लंबी नहीं, बस लम्हों का सिलसिला है,
जिसने वक़्त पर कदर की, उसी को सब कुछ मिला है।
जाने के बाद समझ आई कदर
हॉस्टल की थाली देखी तो आँखें भर आईं,
माँ के हाथ की रोटी की कदर अब समझ आई।
पापा की डाँट तब बहुत बुरी लगती थी,
आज पता चला, उसमें भी फ़िक्र छुपी रहती थी।
दादी की कहानियाँ अधूरी छोड़ सो जाते थे,
आज वही किस्से सुनने को तरस जाते हैं।
स्कूल वाले दोस्तों से मिले बरसों हो गए,
हम बड़े क्या हुए, वो दिन भी कहीं खो गए।
गाँव का आँगन छोटा लगता था कभी,
शहर के फ़्लैट में उसकी कदर हुई तभी।
पेड़ की छाँव का मोल धूप में समझ आया,
अपनों का प्यार परदेस में जाकर याद आया।

प्यार में कदर (Pyar Ki Kadar Shayari)
मोहब्बत में दावे नहीं, कदर चाहिए,
रोज़ थोड़ा सा ख़याल, थोड़ी फ़िक्र चाहिए।
प्यार वही जो बिन माँगे वक़्त दे जाए,
हर छोटी बात में भी तुम्हारी कदर दिखाए।
जिसने तुम्हें तुम्हारी कमियों के साथ अपनाया,
उसकी कदर करना, उसी ने सच्चा प्यार निभाया।
प्यार भी एक पौधे जैसा होता है,
कदर से सींचो, तभी हरा होता है।
वो लड़ते भी हैं तो मनाने आ जाते हैं,
ऐसे लोग किस्मत वालों के हिस्से आते हैं।

तूने मेरी कदर न जानी: जो कदर न करे, उनके लिए
तूने मेरी कदर न जानी, कोई बात नहीं,
अब तेरे लिए मेरे दिल में पहले वाले जज़्बात नहीं।
जहाँ कदर न हो, वहाँ रुकना ठीक नहीं,
हर दरवाज़े पर झुकना ठीक नहीं।
बार-बार मिलने वाले की कदर कम हो जाती है,
इसलिए अब थोड़ी दूरी भी ज़रूरी हो जाती है।
पास था तो तूने मेरी क़ीमत न जानी,
अब दूर हूँ तो याद आती है मेरी हर मेहरबानी।
कदर न करने वालों से शिकायत कैसी,
जो अपना था ही नहीं, उससे चाहत कैसी।
रहीम के दोहों में कदर
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर न मिले, मिले गाँठ परि जाय॥
अर्थ: प्रेम का रिश्ता एक नाज़ुक धागे जैसा है, उसे झटके से मत तोड़ो। टूटा धागा पहले जैसा नहीं जुड़ता, और जुड़ भी जाए तो बीच में गाँठ रह जाती है। यानी रिश्ते की कदर तोड़ने से पहले करो, बाद में नहीं।
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥
अर्थ: बड़ी चीज़ मिल जाने पर छोटी चीज़ को फेंक मत दो। जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती। हर इंसान की अपनी जगह और अपनी कदर होती है, चाहे वो कितना ही छोटा या साधारण लगे।
Kadar Status और Quotes
कदर वक़्त पर हो, तो रिश्ते वक़्त से आगे चलते हैं।
जो आसानी से मिल जाता है, उसकी कदर अक्सर देर से होती है।
अपनों की कदर करो, ग़ैरों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
इज़्ज़त दो, इज़्ज़त मिलेगी, बस इतना सा हिसाब है।
कदर करने वाले कम हैं, पर जो हैं, वही काफ़ी हैं ❤️
आज अपनों की कदर करो, कल सिर्फ़ यादें न रह जाएँ।
जो पास हैं, उनके होने की अहमियत आज ही समझो 🌿
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कदर और क़द्र में क्या फ़र्क़ है?
दोनों एक ही शब्द के दो लिखित रूप हैं। क़द्र नुक़्ते वाली लिखावट है, जो उर्दू में चलती है, और आम हिंदी में ज़्यादातर कदर लिखा जाता है। मतलब दोनों का एक ही है: किसी इंसान, चीज़ या रिश्ते की अहमियत समझना और उसे इज़्ज़त देना।
कोई आपकी कदर न करे तो क्या करें?
पहले एक बार साफ़ शब्दों में बात करें, क्योंकि कई बार सामने वाले को अंदाज़ा ही नहीं होता कि आपको बुरा लग रहा है। अगर उसके बाद भी कुछ न बदले, तो अपनी हद तय करें: हर बार ख़ुद पहल करना, हर बात पर झुकना छोड़ दें। थोड़ी दूरी अक्सर वो समझा देती है जो बातें नहीं समझा पातीं। और अपना वक़्त उन लोगों को दें जो सच में आपकी कदर करते हैं।
किसी की कदर जताने के लिए क्या मैसेज भेजें?
सीधा और सच्चा मैसेज सबसे अच्छा रहता है, जैसे: “शायद मैं कहता नहीं, पर तुम्हारा साथ मेरे लिए बहुत मायने रखता है।” या माँ-पापा के लिए: “आज अचानक आपकी याद आई, बस इतना कहना था कि आपकी हर बात की कदर है।” ऊपर की कोई भी शायरी भी साथ में भेज सकते हैं।