कभी-कभी पूरा पैराग्राफ़ लिखकर मिटा देते हैं और आख़िर में बस एक लाइन भेजते हैं। वही एक लाइन सामने वाले के दिल तक पहुँच जाती है। स्टेटस हो, किसी फ़ोटो का कैप्शन हो या रात को भेजा गया छोटा सा मैसेज, कम शब्दों वाली बात अक्सर सबसे देर तक याद रहती है।
यहाँ सिर्फ़ एक लाइन वाली शायरी है, न दो, न चार। अगर आपको दो लाइन वाली शायरी चाहिए तो 2 Line Shayari देखें।
Pyaar Par One Line Shayari

तुम पास हो तो घड़ी भी जल्दी चलने लगती है।
बात कोई भी हो, घूम-फिर के तुम पर आ जाती है।
तुम्हारा “घर पहुँच गए?” पूछना, किसी ग़ज़ल से कम नहीं लगता।
भीड़ कितनी भी हो, नज़र बस तुम्हें ही ढूँढती है।
दिल आज भी सिर्फ़ तुम्हारा है, बस अब कहता नहीं।
तुम्हें देखा तो लगा, अब तक का सब कुछ बस इंतज़ार था।
Yaad Aur Intezaar Ki One Line Shayari
यादें कभी बूढ़ी नहीं होतीं।
तुम गए नहीं, बस मेरी आदतों में रह गए।
आज भी चाय की दो प्यालियाँ बन जाती हैं, आदत है।
फ़ोन हर बार बजता है, पर वो नाम नहीं आता।
इश्क़ में सबसे ख़ूबसूरत चीज़ इंतज़ार है, और सबसे मुश्किल भी।
Dil Toote To One Line Shayari

उसने “ख़ुश रहना” कहा, और ख़ुशी साथ ले गया।
टूटा मैं भी नहीं, बस पहले जैसा नहीं रहा।
वो लौट भी आए तो अब वो वाली बात नहीं होगी।
सबसे ज़्यादा उसी ने रुलाया, जिसने कहा था कभी रोने नहीं दूँगा।
बहुत सस्ते में टूट गए वो वादे, जो उम्र भर के थे।
Khud Par Aur Attitude One Line Shayari
हम वहाँ खड़े होते हैं जहाँ भीड़ ख़त्म होती है।
हमारी ख़ामोशी भी चर्चा में रहती है।
झुकना आदत नहीं, संस्कार है।
अपनी क़ीमत पता है, इसलिए हर जगह नहीं मिलते।
जो जाना चाहे, उसके लिए दरवाज़ा हम ख़ुद खोल देते हैं।
मैं अपनी कहानी लिख रहा हूँ, किसी और की स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहा।
Zindagi Par One Line Shayari

सुकून सस्ता है, बस लोग उसे महँगी जगहों पर ढूँढते हैं।
दिल साफ़ रखो, हिसाब ऊपर वाला ख़ुद कर लेगा।
ज़िंदगी छोटी नहीं है, हम जीना देर से शुरू करते हैं।
वक़्त सबका आता है, बस सब्र रखना पड़ता है।
हर रोज़ थोड़ा सा जी लेना भी एक जीत है।
Mashhoor Shayaron Ki Ek Line
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है।
— मिर्ज़ा ग़ालिब
इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया।
— मिर्ज़ा ग़ालिब
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ।
— अहमद फ़राज़
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।
— बशीर बद्र
मैं ख़याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है।
— सलीम कौसर