स्कूल में मैडम ने पूछा था, “बड़े होकर क्या बनोगे?” किसी ने डॉक्टर कहा, किसी ने पायलट। आज उनमें से आधे लोग कुछ और कर रहे हैं, पर वो ख़्वाब कहीं गया नहीं। कभी पुरानी डायरी में मिल जाता है, कभी आधी रात को छत पर बैठे-बैठे याद आ जाता है।
ख़्वाब ऐसे ही होते हैं। कुछ किसी के साथ देखे जाते हैं, कुछ अधूरे रहकर भी साथ चलते हैं, और कुछ रात भर सोने नहीं देते। यहाँ हर तरह के ख़्वाब पर शायरी है, ग़ालिब और फ़राज़ जैसे शायरों के मशहूर शेर भी। मेहनत वाले ख़्वाबों के लिए Motivational Shayari और रात के सुकून के लिए Good Night Shayari भी पढ़ें।
Khwab Shayari in Hindi
आँखें बंद करके देखा तो ख़्वाब था,
आँखें खोलकर पीछा किया तो मंज़िल बन गया।
लोग पूछते हैं इतनी रात तक जागते क्यों हो,
उन्हें क्या बताऊँ, कुछ ख़्वाब सोने नहीं देते।
हर रात एक ख़्वाब सिरहाने रखकर सोता हूँ,
सुबह उसी को जेब में रखकर निकल जाता हूँ।
पुरानी डायरी में एक ख़्वाब लिखा मिला,
हैरानी ये थी कि आज भी उतना ही ज़रूरी लगा।
कुछ ख़्वाब किसी से कहे नहीं जाते,
बस चुपचाप पूरे किए जाते हैं।
ख़्वाब और हक़ीक़त में बस इतना फ़र्क़ है,
एक में आँखें बंद रखनी पड़ती हैं, दूसरे में खुली।
Tere Khwab Shayari

आज फिर ख़्वाब में तुम मुस्कुराए,
आज फिर अलार्म से नाराज़गी है।
ख़्वाब देखने की आदत नहीं थी मुझे,
तुमसे मिलकर पड़ गई।
रात भर तुमसे बातें होती रहीं,
सुबह पता चला, वो ख़्वाब था।
नींद से कोई शिकायत नहीं मुझे,
बस वो तुम्हें ख़्वाब में लाने में देर कर देती है।
तुम ख़्वाब में आए तो इतना तो बताते जाते,
असल में कब मिलोगे?
तुम्हारे साथ बूढ़े होने का ख़्वाब है,
बाक़ी सारी ख़्वाहिशें इसके आगे छोटी लगती हैं।
Adhure Aur Toote Khwab Shayari

जिस घर के ख़्वाब हम साथ देखते थे,
उसके पर्दों का रंग तक चुन लिया था, बस घर नहीं बना।
ख़्वाब टूटते हैं तो शोर नहीं होता,
बस अगली सुबह आँखें थोड़ी भारी होती हैं।
अधूरे ख़्वाबों का बोझ अजीब होता है,
दिखता नहीं, पर कंधे झुका देता है।
उसने कहा था ख़्वाब देखना छोड़ दो,
आज समझ आया, वो ख़ुद मेरा सबसे बड़ा ख़्वाब था।
कुछ ख़्वाब पूरे नहीं होते,
हम बस वक़्त के साथ उन्हें देखना छोड़ देते हैं।
बचपन में ख़्वाब बड़े थे और जेबें छोटी,
अब जेबें बड़ी हैं, पर ख़्वाब देखने की फ़ुर्सत नहीं।
टूटे ख़्वाबों को फेंका नहीं मैंने,
उन्हीं के टुकड़ों से नया रास्ता बनाया।
Sapne Poore Karne Ki Shayari

अलार्म हर दिन बजता है,
उठता वही है जिसके पास कोई ख़्वाब होता है।
लोग हँसे थे मेरे ख़्वाब पर,
अब वही पूछते हैं, ये सब किया कैसे?
थकान रोज़ कहती है आज रहने दो,
ख़्वाब रोज़ कहता है, बस थोड़ा और।
घर वाले कहते हैं ख़्वाबों से पेट नहीं भरता,
उन्हें क्या पता, भूख तो उन्हीं से लगती है।
सपना तुम्हारा है,
तो जागना भी तुम्हें ही पड़ेगा।
मंज़िल जितनी दूर हो उतना अच्छा,
ख़्वाब में कितना दम है, पता तो चलता है।
Raat, Neend Aur Khwab Shayari
नींद आज भी पूरी आती है,
बस वो ख़्वाब नहीं आते जो पहले आते थे।
रात को ख़्वाब और दिन को ज़िम्मेदारियाँ,
इन दोनों के बीच ही ज़िंदगी कट रही है।
कुछ रातें ख़्वाब देखने के लिए होती हैं,
और कुछ उन्हें भूलने के लिए।
आँख खुली तो ख़्वाब टूट गया,
पर उसकी मुस्कुराहट सारा दिन साथ रही।
माँ के पास सोता था,
तो बुरे ख़्वाब भी डरकर भाग जाते थे।
Mashhoor Shayaron Ke Khwab Par Sher
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें।
– अहमद फ़राज़
था ख़्वाब में ख़याल को तुझ से मुआमला,
जब आँख खुल गई न ज़ियाँ था न सूद था।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
सबसे ख़तरनाक होता है,
हमारे सपनों का मर जाना।
– पाश
सपने वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं,
सपने वो हैं जो आपको नींद नहीं आने देते।
– डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
Khwab Shayari 2 Line
तुम ख़्वाब ही सही,
पर रोज़ आया करो।
आँखों में ख़्वाब हैं,
और पैरों में अभी जान बाक़ी है।
ख़्वाब मेरे हैं,
तो रास्ता भी मैं ही चुनूँगा।
सोने वाले ख़्वाब देखते हैं,
जागने वाले उन्हें पूरा करते हैं।
कुछ ख़्वाब इतने अपने होते हैं,
कि किसी को बताने का मन नहीं करता।
ख़्वाब ऊँचे रखो,
बस पैर ज़मीन पर रहने दो।