दादी एक बात अक्सर कहती थीं, “नसीब से ज़्यादा और वक़्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता।” बचपन में ये बस एक कहावत लगती थी। बड़े होकर समझ आया कि कुछ चीज़ें पूरी जान लगाकर भी हाथ नहीं आतीं, और कुछ बिना माँगे झोली में आ गिरती हैं।
ये शायरी उन्हीं पलों के लिए है: जब कोई अपना होकर भी नसीब में न हो, जब मेहनत और किस्मत की खींचतान चल रही हो, या जब दिल को बस इतना समझाना हो कि जो मेरा है, वो मुझ तक आएगा। बदलते वक़्त पर Waqt Shayari और ज़िंदगी की बाक़ी सीख के लिए Zindagi Shayari भी पढ़ें।
Naseeb Se Zyada Aur Kismat Se Kam Shayari

नसीब से ज़्यादा और वक़्त से पहले,
न किसी को मिला है, न कभी मिलेगा।
नसीब से ज़्यादा माँगा नहीं कभी,
और किस्मत से कम पर रुका भी नहीं।
नसीब से ज़्यादा किसी को मिलता नहीं,
और किस्मत से कम किसी के हिस्से आता नहीं।
किस्मत से कम मिला तो शिकायत नहीं की,
सोचा, बाक़ी हिस्सा शायद वक़्त के पास रखा है।
नसीब से ज़्यादा की ज़िद नहीं मेरी,
बस जो मेरे हिस्से का है, वो किसी और को न मिले।
जितना लिखा है उतना ही मिलेगा, ये सच है,
पर लिखा क्या है, ये मेहनत करके ही पता चलता है।
Naseeb Shayari 2 Line
नसीब ने जो दिया, रख लिया,
जो नहीं दिया, उसे वक़्त पर छोड़ दिया।
हाथ की लकीरें रोज़ देखा करता था,
फिर एक दिन उन्हीं हाथों से काम लेना शुरू किया।
नसीब बदलने में वक़्त लगता है,
हौसला टूटने में बस एक पल।
जो मेरे नसीब में है,
वो घूम-फिरकर मुझ तक ही आएगा।
किसी और के नसीब पर जलना छोड़ दो,
तुम्हारे हिस्से की धूप अलग है।
सबकी अपनी-अपनी कहानी है,
क्योंकि सबका अपना-अपना नसीब है।
Sad Naseeb Shayari

ग़लती न उसकी थी, न मेरी,
बस हम दोनों एक-दूसरे के नसीब में नहीं थे।
उसे पाने की हर दुआ माँगी मैंने,
बस नसीब से एक बार पूछना भूल गया।
सब कुछ मिला ज़िंदगी में,
बस वही नहीं मिला जिसके लिए सब माँगा था।
किसी को मोहब्बत मिली, किसी को शोहरत,
हमारे हिस्से में बस इंतज़ार आया।
दुआ में उसका नाम लेना नहीं छोड़ा,
बस नसीब से लड़ना छोड़ दिया।
हमने जिसे चाहा, वो हमारा न हुआ,
नसीब का ये फ़ैसला आज तक समझ नहीं आया।
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता।
– निदा फ़ाज़ली
Mohabbat Aur Naseeb Shayari

हाथ की लकीरों में तुम्हारा नाम नहीं था,
मैंने अपनी ज़िद से लिख दिया।
तुम मिले तो लगा,
नसीब ने पहली बार मेरी सुनी है।
लाखों की भीड़ में तुमसे ही मिलना,
इसे इत्तेफ़ाक़ कहूँ या नसीब?
तुम्हें किसी मंदिर में माँगा भी नहीं था,
फिर भी मिल गए, इसे नसीब ही कहूँगा।
जो हमारे लिए बना होता है,
वो किसी न किसी बहाने पास आ ही जाता है।
Mehnat Aur Kismat Shayari
नसीब के भरोसे बैठा रहता तो आज भी वहीं होता,
पैरों ने चलना शुरू किया तो रास्ते भी बदल गए।
नसीब बस दरवाज़ा दिखाता है,
खटखटाना तुम्हें ख़ुद पड़ता है।
लोग कहते हैं उसका नसीब अच्छा था,
उसकी रातें किसी ने नहीं देखीं।
किस्मत की लकीरों से ज़्यादा,
मुझे अपने हाथों के छालों पर भरोसा है।
नसीब पत्ते बाँटता है,
खेलना कैसे है, ये हम तय करते हैं।
Naseeb Par Bharosa Shayari
जो चला गया, उसे जाने दो,
शायद नसीब ने कुछ बेहतर लिख रखा है।
नसीब का फ़ैसला ग़लत नहीं होता,
बस समझ में थोड़ी देर से आता है।
आज जो देर लग रही है,
कल वही सही वक़्त कहलाएगी।
जो तुम्हारे पास है, वो किसी की दुआ है,
उसे यूँ ही मामूली मत समझना।
माँ कहती थी, जो तेरा है वो कहीं नहीं जाएगा,
आज समझ आया, वो नसीब की बात कर रही थी।