आँसू अक्सर ग़लत वक़्त पर आते हैं। ऑफ़िस की मीटिंग के बीच, बस की खिड़की वाली सीट पर, या माँ का फ़ोन उठाते वक़्त, जब आवाज़ एकदम ठीक रखनी होती है। और कुछ आँसू ऐसे भी होते हैं जो पहली सैलरी पापा के हाथ में रखते ही अपने आप निकल आते हैं।
यहाँ आँसुओं पर ऐसी ही शायरी है: छुपाए हुए आँसू, लड़कों के वो आँसू जो कोई नहीं देखता, प्यार में बहे आँसू, ख़ुशी के आँसू, माँ पापा के आँसू, 2 लाइन की छोटी शायरी, और बशीर बद्र, ज़ौक़, साहिर लुधियानवी जैसे शायरों के आँसुओं पर शेर। ज़िंदगी और अपनों के दर्द पर और पढ़ना हो तो Dard Bhari Shayari देख सकते हैं।
Aansu Shayari in Hindi
आँसू कभी झूठ नहीं बोलते,
जो बात ज़ुबान छुपा ले, वो ये चुपचाप कह जाते हैं।
रोने के लिए कोई बड़ी वजह नहीं चाहिए होती,
कभी किसी का बस इतना पूछ लेना काफ़ी है कि तुम ठीक हो?
आँसू कमज़ोरी नहीं हैं,
जो ज़्यादा महसूस करते हैं, आँखें भी उन्हीं की ज़्यादा भीगती हैं।
कुछ लोग आँसुओं की वजह बन जाते हैं, कुछ उन्हें पोंछने वाले,
फ़र्क़ बस इतना है कि हमने अपना किसे समझा था।
कभी कभी रो लेना भी ज़रूरी है,
हर बोझ मुस्कुराकर नहीं उतरता।
आँसू वो बात हैं जो दिल बोलता है,
जब ज़ुबान ने चुप रहने की क़सम खा ली हो।
Aankhon Mein Aansu Shayari (छुपाए हुए आँसू)

नल पूरा खोल दिया था बाथरूम में,
ताकि बाहर किसी को रोने की आवाज़ न जाए।
हेलमेट का शीशा नीचे था और सड़क लंबी,
उस दिन घर पहुँचने से पहले जी भरकर रो लिया।
बारिश में भीगने का शौक़ कभी नहीं था,
बस उस दिन आँसू छुपाने की कोई और जगह नहीं मिली।
आँखें भर आईं तो फ़ोन में कुछ ढूँढने लगे,
आजकल रोना भी स्क्रीन के पीछे छुपाना पड़ता है।
मीटिंग में सब नॉर्मल था, लंच भी सबके साथ किया,
आँसू तो पार्किंग में गाड़ी का दरवाज़ा बंद करके आए।
सबसे भारी आँसू वो होते हैं,
जो किसी के सामने गिर नहीं पाते।
Ladkon Ke Aansu Shayari
लड़के रोते नहीं, ये बचपन से सुनते आए,
इसलिए आज तक किसी को पता ही नहीं चला कि हम कितनी बार रोए।
घर की ज़िम्मेदारी आई तो आँसुओं को छुट्टी दे दी,
अब रोना भी हो तो पहले देखना पड़ता है कि कोई देख तो नहीं रहा।
बहन की विदाई पर सबने जी भरकर रो लिया,
भाई टेंट वाले का हिसाब करता रहा, उसे रोने की फ़ुर्सत किसने दी।
माँ का फ़ोन आया तो पहले आवाज़ ठीक की, फिर उठाया,
बेटा हूँ, उसके सामने तो रो भी नहीं सकता।
दोस्तों में सबसे ज़्यादा हँसाने वाला वही था,
रात को छत पर अकेले सबसे ज़्यादा रोने वाला भी वही।
मर्द को दर्द नहीं होता, ये फ़िल्मी बात है,
बस उसके आँसू किसी को दिखते नहीं।
Pyar Mein Aansu Shayari

सबके सामने हँसकर विदा किया उसे,
आँसू तो ऑटो में बैठने के बाद आए।
तुमने कहा था रोना मत,
बस यही एक बात आज तक नहीं मानी।
आख़िरी मैसेज में उसने बस “ख़्याल रखना” लिखा था,
उन दो शब्दों पर पूरी रात रोए।
उसकी शादी की फ़ोटो सबने लाइक की,
हमने देखी, फ़ोन उल्टा रखा, और देर तक रोते रहे।
जिसे सबसे ज़्यादा चाहा, उसी ने सबसे ज़्यादा रुलाया,
और अजीब ये कि शिकायत भी उसी से करने का मन करता है।
रोते हुए भी तुझे ही फ़ोन करने का मन करता है,
जबकि रुलाने वाला भी तू ही है।
उसकी गली से गुज़रना कब का छोड़ दिया,
आँखें आज भी उस मोड़ पर भर आती हैं।
Khushi Ke Aansu Shayari

पहली सैलरी पापा के हाथ में रखी,
वो कुछ बोले नहीं, बस चश्मा उतारकर आँखें पोंछने लगे।
रिज़ल्ट में अपना नाम देखा तो चीख़ निकलनी थी,
पर निकले सिर्फ़ आँसू, और माँ का नंबर।
बेटी ने पहली बार “पापा” कहा,
और घर का सबसे सख़्त आदमी बच्चों की तरह रो पड़ा।
कुछ आँसू इतने मीठे होते हैं,
कि उन्हें पोंछने का भी मन नहीं करता।
फ़ाइनल जीतने के बाद ग्राउंड पर सब नाच रहे थे,
और कोच एक कोने में चुपचाप आँखें पोंछ रहा था।
सालों बाद पुराना दोस्त स्टेशन पर दिखा,
गले मिले तो दोनों में से कोई कुछ बोल ही नहीं पाया।
Maa Papa Ke Aansu Shayari
पापा को पहली बार दीदी की विदाई पर रोते देखा,
उस दिन समझ आया कि सख़्त लोग अंदर से कितने नरम होते हैं।
माँ के आँसू कभी अपनी तकलीफ़ पर नहीं निकले,
हमेशा हमारी किसी छोटी सी चोट पर निकले।
हॉस्टल छोड़कर लौटते वक़्त माँ पूरे रास्ते रोती रही,
और फ़ोन पर बोली, कुछ नहीं, ज़ुकाम हो गया है।
जिस दिन माँ की आँखों में आँसू मेरी वजह से आए,
उस दिन जीता हुआ सब कुछ हारा हुआ लगा।
पापा अब छोटी छोटी बात पर रो देते हैं,
शायद पूरी उम्र के रोके हुए आँसू अब निकल रहे हैं।
Aansu Shayari 2 Line
आँसू भी अजीब हैं, सबसे ज़्यादा वहीं आते हैं,
जहाँ रोने की इजाज़त नहीं होती।
मुस्कान सबके लिए,
आँसू बस अपने कमरे के लिए।
रो लिया, हल्के हुए,
और फिर से सबके लिए ठीक हो गए।
कुछ आँसू गिरते नहीं,
आँखों में ही रह जाते हैं।
उसने पूछा, रो रहे हो?
हमने कहा नहीं तो, और फिर रो दिए।
आँखें भर आईं,
और बात वहीं ख़त्म हो गई।
Mashhoor Shayaron Ke Aansu Par Sher
उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया,
मुद्दतों बा’द मिरी आँखों में आँसू आए।
– बशीर बद्र
एक आँसू ने डुबोया मुझ को उन की बज़्म में,
बूँद भर पानी से सारी आबरू पानी हुई।
– शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा,
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा।
– साहिर लुधियानवी
रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसू,
ख़ास मौक़ों पे मज़ा देते हैं।
– मोहम्मद अल्वी
ये आँसू बे-सबब जारी नहीं है,
मुझे रोने की बीमारी नहीं है।
– कलीम आजिज़
मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो,
मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है।
– मुस्तफ़ा ज़ैदी
आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से,
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही।
– जलील मानिकपुरी