इश्क़ का कोई तय दिन नहीं होता। कोई बस में बगल वाली सीट पर बैठ जाता है, कोई दोस्त की शादी में दिख जाता है, और फिर सब कुछ उसी के आसपास घूमने लगता है। अक़्ल कहती रहती है कि संभल जाओ, पर दिल तब तक बहुत आगे निकल चुका होता है।
यहाँ उसी इश्क़ पर शायरी है: उसका जुनून, उसकी सूफ़ियाना इबादत, पुराने इश्क़ की यादें, और ग़ालिब, मीर जैसे शायरों के मशहूर शेर। सुकून और भरोसे वाले प्यार के लिए True Love Shayari और Mohabbat Shayari भी पढ़ें।
Ishq Shayari in Hindi
इश्क़ में सबसे मुश्किल काम पता है क्या है?
उसका “ठीक हूँ” सुनकर मान लेना।
उसने बस नाम पूछा था,
और मैंने अपनी पूरी कहानी सुना दी।
तुम्हारी एक “हम्म” पर भी,
मैं पूरी रात का मतलब निकाल लेता हूँ।
पूरा शहर घूम लिया, हर गली देख ली,
दिल को फिर भी तेरी गली ही अपनी लगी।
इश्क़ कोई बड़ा वादा नहीं माँगता,
बस थककर लौटो तो कोई दरवाज़े पर मिल जाए।
इश्क़ में हिसाब रखने वाले कारोबार करते हैं,
हम तो हारकर भी मुस्कुरा देते हैं।
Ishq Ka Junoon Shayari

छाता हाथ में था, फिर भी भीगता रहा,
नज़र उसकी खिड़की पर थी, छाते पर नहीं।
लोग कहते हैं पागल हो गया है,
उन्हें क्या पता, पहली बार होश में हूँ।
उसकी गली से गुज़रने के बहाने ढूँढता हूँ,
रास्ता लंबा है, पर दिल को यही छोटा लगता है।
अक़्ल ने बहुत समझाया, दिल ने एक न सुनी,
इश्क़ में आख़िर जीतता वही है जो ज़िद्दी हो।
दीवानगी का कोई सबूत नहीं होता,
बस फ़ोन की हर घंटी पर दिल उछल पड़ता है।
सबने कहा उसे भूल जाना आसान है,
मैंने कहा, ठीक है, पहले तुम करके दिखाओ।
पूरी दुनिया से लड़ जाऊँगा तेरे लिए,
बस तू एक बार कह दे कि मैं ग़लत नहीं हूँ।
Sufi Ishq Shayari

दरगाह पर धागा बाँधा, पर कुछ माँगा नहीं,
बस इतना कहा, वो जहाँ भी रहे, ख़ुश रहे।
तुझे चाहना भी एक इबादत सी है,
न कुछ माँगता हूँ, न कुछ छुपाता हूँ।
इश्क़ जब रूह तक पहुँचता है,
तो “मैं” और “तू” का फ़र्क़ मिट जाता है।
मंदिर हो या मस्जिद, सजदा एक ही है,
जहाँ तू याद आ जाए, वहीं इबादत हो जाती है।
न जीतने की ज़िद, न खोने का डर,
ऐसा इश्क़ बस फ़क़ीरों के हिस्से आता है।
ख़ुद को खोकर देखा तो समझ आया,
इश्क़ में फ़ना होना हार नहीं होती।
Ishq Aur Mohabbat Mein Farq Shayari
मोहब्बत साथ बैठकर चाय पीना है,
इश्क़ उसके इंतज़ार में ठंडी चाय भी पी लेना है।
मोहब्बत में इंसान सोचता है,
इश्क़ में बस कर गुज़रता है।
मोहब्बत में “हम” होते हैं,
इश्क़ में “मैं” बचता ही नहीं।
मोहब्बत को कोई वजह चाहिए,
इश्क़ बेवजह होता है, और बेहिसाब भी।
मोहब्बत छूट जाए तो शिकायत करती है,
इश्क़ छूट जाए तो भी दुआ देता है।
Purana Ishq Shayari

कॉलेज की एक पुरानी फ़ोटो मिली आज,
उसमें वो पीछे खड़ी थी, और मैं आज भी उसी को देख रहा था।
किसी शादी की भीड़ में बरसों बाद मिले,
दोनों मुस्कुराए, और कुछ नहीं कहा।
पहला इश्क़ कहीं जाता नहीं,
बस दिल के किसी कोने में चुपचाप बैठ जाता है।
आज भी उस गाने पर रुक जाता हूँ,
जो कभी उसके फ़ोन की रिंगटोन हुआ करता था।
वक़्त ने शहर बदला, लोग बदले, आदतें बदलीं,
बस उसका नाम सुनकर धड़कन आज भी वही है।
Mashhoor Shayaron Ke Ishq Par Sher
इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया,
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
ये इश्क़ नहीं आसाँ बस इतना समझ लीजे,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।
– जिगर मुरादाबादी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या,
आगे आगे देखिए होता है क्या।
– मीर तक़ी मीर
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
Ishq Shayari 2 Line
इश्क़ है,
कोई अर्ज़ी नहीं कि मंज़ूर हो।
तुम मिलो या न मिलो,
इश्क़ तो हो चुका।
थोड़ा सा इश्क़,
और बहुत सारा इंतज़ार।
मुझे तुमसे इश्क़ है,
ये बात तुम्हें छोड़कर सबको पता है।
दिल ने पूछा तक नहीं,
और तुमसे इश्क़ कर बैठा।
इश्क़ उम्र नहीं देखता,
बस आँखें देखता है।