दर्द हमेशा किसी बड़ी वजह से नहीं होता। कभी माँ फ़ोन पर पूछ लेती है “खाना खाया?” और गला भर आता है। कभी कोई अपना बिना कुछ कहे बदल जाता है। और कभी पूरा दिन सबके सामने हँसने के बाद, रात को कमरे में आकर समझ ही नहीं आता कि थकान किस बात की है।
ऐसे ही दिनों के लिए यहाँ दर्द भरी शायरी है: ज़िंदगी और अपनों से मिला दर्द, प्यार का दर्द, मुस्कान के पीछे छुपा दर्द, घर से दूर रहने का दर्द, रात की तन्हाई, 2 लाइन की छोटी शायरी, और ग़ालिब, मीर, गुलज़ार जैसे शायरों के शेर। दिल टूटा है तो Broken Heart Shayari और चुपचाप सहे गए दर्द के लिए Khamosh Dard Shayari भी पढ़ सकते हैं।
Dard Bhari Shayari in Hindi
दर्द की कोई आवाज़ नहीं होती,
बस आदमी पहले से थोड़ा कम बोलने लगता है।
आँसू तब नहीं आते जब कोई छोड़ जाता है,
आँसू तब आते हैं जब कोई साथ होकर भी दूर हो जाता है।
सबको लगता है हम बदल गए,
किसी ने ये नहीं पूछा कि हुआ क्या था।
अब किसी से कोई शिकायत नहीं,
जो मिला वो क़िस्मत थी, जो गया वो वक़्त था।
दर्द ये नहीं कि वो चला गया,
दर्द ये है कि जाते वक़्त उसे कुछ भी बुरा नहीं लगा।
कुछ बातें इतनी चुभती हैं,
कि सालों बाद भी याद आएँ तो चुप हो जाते हैं।
Zindagi Ki Dard Bhari Shayari
बचपन में जल्दी बड़े होने की बहुत जल्दी थी,
अब समझ आया कि बड़ा होना किसे कहते हैं।
सपने तो आज भी वही हैं,
बस अब उनके आगे घर की ज़िम्मेदारियाँ खड़ी हैं।
महीने के आख़िर में जेब ही ख़ाली नहीं होती,
कुछ हौसला भी ख़र्च हो जाता है।
ज़िंदगी ने हर बार यही सिखाया,
जो चीज़ सबसे ज़्यादा चाहो, वो सबसे देर से मिलती है।
हम हारे नहीं हैं,
बस अब हर लड़ाई के बाद थोड़ा ज़्यादा थक जाते हैं।
लोग पूछते हैं इतने चुप क्यों रहते हो,
जवाब देने बैठें तो पूरी ज़िंदगी सुनानी पड़ेगी।
Apno Se Mila Dard Shayari
ग़ैरों की बात का बुरा कभी नहीं लगा,
चोट तो उन्हीं की लगी जिनके लिए सब छोड़ा था।
जिसके लिए सबसे पहले खड़े हुए,
ज़रूरत पड़ी तो वही सबसे आख़िर में आया।
अपनों ने कुछ ख़ास नहीं किया,
बस जब ज़रूरत थी, तब फ़ोन नहीं उठाया।
घर में सब हैं, बातें भी होती हैं,
पर दिल की बात कहने वाला कोई नहीं।
हमने रिश्ते बचाने के लिए हर बार झुकना सीखा,
उन्होंने इसे हमारी आदत समझ लिया।
बुरा वक़्त भी एक काम का निकला,
किसकी कितनी परवाह थी, सब दिखा गया।
Pyar Mein Dard Bhari Shayari

तुमसे शिकायत नहीं, ख़ुद से है,
कि सब जानते हुए भी तुम पर इतना भरोसा क्यों किया।
उसने बस इतना कहा कि अब पहले जैसा नहीं रहा,
और हम सोचते रह गए कि पहले जैसा था क्या।
जिसे चाहा था, वो किसी और का हो गया,
और हम अब भी उसकी ख़ुशी की दुआ माँगते हैं।
तुम्हारा नंबर अब भी है फ़ोन में,
डिलीट करने की हिम्मत नहीं, मिलाने की वजह नहीं।
प्यार अधूरा रह जाए तो उतना दर्द नहीं देता,
जितना ये सोचना कि शायद थोड़ा और रोक लेते।
वो चला गया, ये तो सह लिया,
पर हर बात में उसका ज़िक्र आ जाना नहीं सहा जाता।
Muskurahat Ke Peeche Chhupa Dard
हम मुस्कुरा तो रहे हैं,
पर ख़ुश होने की बात किसने कही।
हमने हँसकर हर दर्द छुपाया,
लोगों ने इसे हमारी ख़ुशी समझ लिया।
दोस्तों में सबसे ज़्यादा हम ही बोलते थे,
किसी ने ग़ौर नहीं किया कि अपनी बात कभी नहीं की।
“ठीक हूँ” कहना इतना आसान हो गया है,
कि अब ख़ुद भी यक़ीन करने लगे हैं।
सबके सामने रोना अच्छा नहीं लगता,
इसलिए हम मज़ाक़ बहुत करते हैं।
Ghar Se Door Hone Ka Dard

माँ ने पूछा खाना खाया,
हमने कहा हाँ, और ठंडी रोटी चुपचाप खा ली।
शहर ने नौकरी दी, पैसे दिए, नाम भी दिया,
बस किसी ने आवाज़ देकर खाने पर नहीं बुलाया।
बीमार होने पर सबसे ज़्यादा याद घर आता है,
यहाँ तो दवा भी ख़ुद ही लानी पड़ती है।
हर बार छुट्टी में घर जाते हैं,
और हर बार पापा थोड़े और बूढ़े लगते हैं।
त्योहार पर घर नहीं जा पाए,
वीडियो कॉल पर सबको हँसता देखा और फ़ोन रख दिया।
Raat Aur Akelepan Ka Dard
दिन तो किसी तरह कट जाता है,
रात को सारी बातें एक साथ याद आती हैं।
दर्द की रातें लंबी होती हैं,
और यादें सोने नहीं देतीं।
जो सबके लिए हर वक़्त हाज़िर रहा,
रात को छत ताकते हुए सोचता है, उसके लिए कौन है।
अकेलापन ये नहीं कि कोई पास नहीं,
अकेलापन ये है कि कोई पूछे तो बताने को कुछ नहीं।
पंखा चलता रहता है, छत वहीं रहती है,
और नींद रोज़ किसी और के घर चली जाती है।
Rula Dene Wali Dard Bhari Shayari

सबके लिए कुर्सियाँ आज भी लगती हैं,
पापा आज भी सबकी थाली गिनते हैं,
बच्चे अपने-अपने शहर के हो गए,
बस अब खाने पर कोई नहीं आता।
जिसने उँगली पकड़कर चलना सिखाया,
आज उसी के पास बैठने का वक़्त नहीं,
माँ कुछ नहीं कहती, बस फ़ोन पर,
हर बार पूछती है “कब आओगे?”
जिसे सबसे ज़्यादा अपना माना,
उसी ने सबसे ज़्यादा अजनबी बना दिया,
शिकायत भी किससे करते,
जिससे करनी थी, वही तो वजह था।
बहुत कुछ कहना था उस दिन,
सोचा कल कह देंगे,
फिर वो कल आया ही नहीं,
और बात आज तक दिल में रखी है।
हमने उसे रोका नहीं,
सोचा जो अपना है लौट आएगा,
वो नहीं लौटा, और हम आज भी,
दरवाज़ा पूरा बंद नहीं करते।
Dard Bhari Shayari 2 Line
दर्द तो क़िस्मत में था,
वरना कोई इतना अपना क्यों बनता।
कुछ लोग दिल में बस जाते हैं,
पर नसीब में नहीं होते।
सब कुछ ठीक है,
बस अब कुछ भी पहले जैसा नहीं।
तुम्हें भूलना मुश्किल नहीं था,
मुश्किल था वो सब जो तुम्हारे साथ जुड़ा था।
रोने की जगह नहीं मिली,
तो हमने हँसना सीख लिया।
उसके बाद किसी पर भरोसा नहीं हुआ,
ये उसका दिया सबसे बड़ा दर्द है।
हम दूसरों को समझाते रहे,
और ख़ुद को समझाने वाला कोई नहीं मिला।
लोग कहते हैं वक़्त सब ठीक कर देता है,
वक़्त बस दर्द के साथ जीने की आदत डाल देता है।
Mashhoor Shayaron Ki Dard Bhari Shayari
दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ,
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
देख तो दिल कि जाँ से उठता है,
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है।
– मीर तक़ी मीर
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया,
जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया।
– शकील बदायूँनी
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।
– बशीर बद्र
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी,
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में।
– जौन एलिया
आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई।
– गुलज़ार